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प्रतिवेदन के अभाव में सीतामढ़ी के 45+1 शिक्षा स्वयं सेवियों का मानदेय भुगतान अधर में

तत्कालीन ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सीतामढ़ी ने निदेशक जन शिक्षा पटना को पत्र लिखकर 46 शिक्षा स्वयं सेवक के मानदेय भुगतान करने के लिए जनवरी 2016  से राशि की माँग की गई थी जिसके आलोक में निदेशक जन शिक्षा पटना ने पूर्व में दो पत्र क्रमशः पत्रांक 483 दिनांक 08.03.2017 और पत्रांक 1134 दिनांक  24.05.2017 को निर्गत कर नियोजन एवं प्रशिक्षण से संबंधित प्रतिवेदन साक्ष्य के साथ समर्पित करने का निदेश ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी सीतामढ़ी को दिया था ताकि मानदेय भुगतान की राशि आवंटित की जा सके मगर प्रतिवेदन प्रस्तुत नही किया गया।पुनः निदेशक जन शिक्षा पटना ने पत्रांक 1312 दिनांक 14.06.2017 निर्गत कर एक सप्ताह के अन्दर प्रतिवेदन की माँग की और लिखा है कि प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मानदेय भुगतान नही होने के फलस्वरूप सारी जवाबदेही आपकी मानी जायेगी।
बताते चलें कि जनवरी 2016 में 45 शिक्षा स्वयं सेवी का योगदान कराया गया था और एक शिक्षा स्वयं सेवी का योगदान ज़िला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सीतामढ़ी के निर्णय के आलोक में जुलाई 2016 को अमल में आया था।

""पाँच माह पश्चात भी ज़िला साक्षरता कार्यलय ने निदेशक पटना को प्रतिवेदन समर्पित नही किया है जिस कारण मानदेय भुगतान राशि आवंटित नही हो पा रहा है ""।

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सोचने वाली बात ये है कि जब सरकार तालिमी मरकज़ और उत्थान केंन्द्र के कर्मी को निविदा कर्मी और नियोजित मानने को तैयार नही -------
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