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सीतामढ़ी ज़िला तालीमी मरकज़ संघ हक़ीक़त के आईने में

सीतामढ़ी ज़िला तालीमी मरकज़ संघ हक़ीक़त के आईने में
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सीतामढ़ी ज़िला में तालीमी मरकज़ का आग़ाज़ सन 2010 में हुआ शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने जिला तालीमी मरकज़ संघ का जिला अध्यक्ष पुपरी के रहने वाले इम्तेयाज़ साहब को बनाया इम्तेयाज़ साहब के बाद नानपुर ब्लॉक के एजाज़ कौसर खान को इस बुनियाद पर जिला सदर की सदारत सौंपी गई कि ये सीतामढ़ी में ही मुक़ीम रहते हैं ।सीतामढ़ी रहने की वजह कर तालीमी मरकज़ के रेज़ाकारों की परेशानिओं का एजाला अफसर से मिलकर करेंगें साथ ही संघ को मजबूत कर संघर्ष कर सरकार से तालीमी मरकज़ को वाज़िब हक़ दिलवाएंगे मगर तालीमी मरकज़ के लोगों का यह ख्वाब ख्वाब ही बन कर रह गया और आज अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।ज़िला से लेकर प्रखण्ड सतह तक तालीमी मरकज़ संघ का कोई वजूद नही है हाँ नाम नेहाद ज़िला सदर ब्लॉक सदर ज़रूर हैं जिनको तालीमी मरकज़ के लोगों से खातिर खाह कोई लेना देना नही।हक़ीक़त तो ये है कि जिला में तालीमी मरकज़ का कोई फयाल वर्किंग कमेटी नही है वही हाल ब्लॉक सतह का भी है इनके ज़िला सदर और ब्लॉक सतह के सदर का काम सिर्फ और सिर्फ ओहदा महफूज़ रहे ताकि ऑफिसर की निगाहें करम बनी रहे इसके इलावा कुछ भी नहीं।मौजूदा कमिटी से तालीमी मरकज़ के रेज़ाकारों का कितना नुकसान हुआ इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2010 में तालीमी मरकज़ के बहुत से भाई आज भी सड़कों की धूल फाँक रहे हैं और ये मौजूदा सदर की नज़र अंदाज़ी की वजह कर हुआ।पुराने साथियों को मुख्यमंत्री अक्षर आँचल योजना में आने के लिए भी एक तह शुदा रक़म चुकानी पड़ी,और अभी जो लोग काम कर रहे हैं उन्हें वक़्तन फवक्तन चुकानी पड़ती है।यहाँ के जिला सदर ने संघ के मकसद को ही तब्दील कर रख दिया सीतामढ़ी ज़िला तालीमी मरकज़ का ऐसा एक भी कारनामा नही जिस को याद किया जा सकता हो, या ये कहा जा सके कि सीतामढ़ी तालीमी मरकज़ ने किसी मुद्दे को लेकर जिला या सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद किया है।
2013 से लेकर 2017 तक तालीमी मरकज़ रज़ाकारों का कई डिपार्टमेंटल ट्रैनिंग हुआ मगर क्या किसी को सर्टिफिकेट मिला जबकि ये ट्रेनिंग लेने वाले का हक़ है जो सर्विस पीरियड में कारामद होता है क्या इसके लिए पुरज़ोर आवाज़ बुलंद की गई ? नही ना
जनवरी 2016 में ट्रेनिंग हासिल शुदा और जिला लोक शिकायत निवारण के आदेश पर जिनका योगदान हुआ उस का पेमेंट नही होता है और जो 29 जुलाई 2016 को योगदान करते हैं उनका पेमेंट हुआ और हो रहा है क्या इस के खिलाफ आवाज़ बुलन्द की गई ? नही ना
एस्टेब्लिशमेंट लिस्ट में रज़ाकारों की तफ़सीलात ग़लत इंद्राज की गई जोइनिंग लेटर ग़ायब किया गया क्या इसके खिलाफ आवाज़ बुलन्द की गई ? नही ना
तो फिर

क्या ऐसे ग़ैर सक्रिय/खामोसी इख़्तेयार कमिटी से जिला तालीमी मरकज़ के रज़ाकारों का मुस्तक़बिल ताबनाक हो सकता है ? ये ज़िला के तमाम रज़ाकारों को सोचना चाहिए/सोचना होगा ।ज़िला तालीमी मरकज़/ब्लॉक कमिटी को सिरे से तहलील (निरस्त) कर एक ईमानदार कमिटी की तश्किल करेँ जो सिर्फ और सिर्फ आपके ताबनाक मुस्तक़बिल के लिए काम करे।

" ज़िला सीतामढ़ी तालीमी मरकज़ संघ एक superseded committee है क्योंकि ज़िला कमिटी इंतेखाब 20.12.2012 को हुआ था।किसी भी कमिटी का कार्यकाल तीन/पाँच साल का होता है कमिटी का तीन साल का कार्यकाल 20.12.2015 को समाप्त हो जाता है कमिटी के कार्यकाल समाप्ति से पूर्व नए कमिटी का इंतेखाब नही हुआ लिहाज़ा कार्यकाल समाप्ति के बाद कमिटी स्वतः भंग हो जाती है और वह सुपर सीड कमिटी कहलाती है।सुपरसीड कमिटी में कोई चेयरमैन प्रेजिडेंट नही होता।
16.02.2016 को बीना इंतेखाब/ आम सभा के इत्तेफ़ाक़ राय के नई कमिटी बना ली गई जो ग़ैर क़ानूनी है।
16.02.2016 को अपने मन से कमिटी बनाने से ज़ाहिर है कमिटी का कार्य काल तीन साल ही है पाँच साल नही।
सुपरसीड (भंग)कमिटी की बैठक बुलाना बहैसियत  चेयरमैन मज़हक़ह ख़ेज़(हास्यापद)है।
जब तक आम सभा से जिला कमिटी का चुनाव नही हो जाता है तब तक ज़िला तालीमी मरकज़ के साथ सभी तरह की कमिटी भंग है कोई चेयरमैन प्रेसिडेन्ट  नही। ""

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तालिमी मरकज़ हों या उत्थान केंन्द्र के साथी सभों की ख्वाहिश है कि उनको सरकार राज्य कर्मी घोषित कर वेतनमान दे मगर ज़रा सोचें क्या सरकार ये माँग  तालिमी मरकज़ और उत्थान केंन्द्र को देने जा रही है ?
सोचने वाली बात ये है कि जब सरकार तालिमी मरकज़ और उत्थान केंन्द्र के कर्मी को निविदा कर्मी और नियोजित मानने को तैयार नही -------
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