लिज्जत ए दर्द वफा

इब्राहीम अश्क
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लिज्जत ए दर्द वफा और बढ़ा दे जाना ।
दिल में जख्मो के नये फूल खिला दे जाना।।
इश्क मेरा ढनक रंग हुआ जाता है ।
तु भी कुछ रंग मुहब्बत के मिला दे जाना।।
तेरी तस्वीर बनाई है फ़लक पर मैंने।
मांग में चाँद सितारों को सजा दे जाना ।।
बे खुली में न रहे आलम ए हस्ती का ख्याल ।
तु भी औरों की तरह मुझ को भुला दे जाना।।
हम तो हैं खाक ए नशीं अर्श को छुने वाले ।
अज़मतें और मुहब्बत की बढ़ा दे जाना ।।
अपने दर से तेरे घर तक का सफर करना है।
दूर से तु मुझे आवाज़ लगा दे जाना ।।
मेरी तख्लिक़ तेरे से मंसूब   हुई     ।
बज्म दुनिया में ग़जल मेरी सुना दे जाना ।।
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