Skip to main content

मर्द और औरत के बीच की ग़ैर बराबरी ख़त्म होनी चाहिए

मेहजबीन

--------------

"दुश्मन न करे दोस्त ने ये काम किया है। 
उम्र भर का ग़म हमें ईनाम दिया है" 

शाम को बीवी का हंसता मुस्कुराता चेहरा  दिन भर की थकान से, शौहर को हस्सास बशास कर देता है। क्या यही बात शौहर पर लागू नहीं होनी चाहिए, क्या सिर्फ दिन भर शौहर ही काम करता है ?मेहनत करता है ?बीवी कुछ भी नहीं करती ? बल्कि वो तो घर के अंदर - बाहर, सास - ससुर, बच्चों की देखभाल भी करती है दिन भर, और फिर रात को भी खटती है, सुबह बिस्तर से उठकर फिर रात को बिस्तर पर जाकर ही, फुर्सत मिलती है। अगर बीवी के मुस्कुराते चेहरे को देखकर शौहर को सकून व आराम मिलता है तो, फिर बीवी भी तो आराम और सकून की तलबग़ार है, वो भी तो किसी की मुस्कान देखना चाहती है, होता यह है कि दिनभर बाहर, दफ्तर बस, मेट्रो, कामकाज़  सहकर्मियों के साथ हुई तू - तू, में - में की भड़ास मर्द घर आकर अपनी औरतों पर उतारते हैं, यानी उसी औरत की मुस्कान से अपनी थकान भी दूर करनी है, और उसी को गालियाँ सुनाकर अपनी दबी हुई भड़ास भी निकालनी है। ऐसे में पति के घर आते ही गालियाँ सुनने के बाद, बुरा भला सुनने के बाद, वो औरत कैसे मुस्कुराएगी ? किस मन से मुस्कुराएगी? शौहर के पैरों के नीचे जन्नत है, और उस जन्नत को पाने के लिए, हंसने की ऐक्टिंग ही तो करेगी बेचारी, असली हंसी तो नहीं हंसेगी न। कुछ घरों में शायद ऐसा न होता हो, जहाँ पति - पत्नी एक दूसरे को बराबर का दर्ज़ा देते हों, समझते हों, मुहब्बत करते हों, सुलझे हुए हों,एक दूसरे को अहमियत देते हों, मगर ज़्यादा तर घरों में तो ग़ैरबराबरी ही होती है। 

बीवी हमेशा जी हुज़ुरी में रहे, शौहर के लिए सजे संवरे, मुस्कुराती रहे और शौहर तानाशाह की तरह उसे सिर्फ अपनी ज़रूरत पुरी करने का ज़रिया ही समझे। इंसान नहीं समझे, अल्लाह की मख़लूक़ नहीं, हमसफर नहीं, दोस्त नहीं। शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी पुरुषों के अंदर से पुरुषवादी मानसिकता समाप्त नहीं हुई। वो सिर्फ पैसा कमाने की मशीन ही बने, ऐसे ही महिलाएं भी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी, सिर्फ पैसा ही जुटा सकी हैं, मध्यकालीन सोच से उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। सास - बहू, ननद - भाभी, देवरानी-जेठानी की सियासत उनपर आज भी हावी है, औरत ही औरत की दुश्मन बनी हुई है, फिर पुरुषों से संवेदना कहां से मिले? 

उर्दू साहित्य की  रचनाकार इस्मत चुग्तई जी की कहानी 'छुईमुई'(टच मी नॉट )  भी कुछ ऐसे ही विषय पर लिखी गई है। कि औरत सिर्फ शोहर के सकून आराम के लिए है, उसके मनोरंजन के लिए, उसकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, और उसके ख़नदान को वारिस देने के लिए है, सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन है। और इन सब ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उसे कुछ भी करना पड़े, चाहे जितने भी दु:ख झेलने पड़े, और इन सब दु:ख तक़लीफों में उसे सजे- संवरे भी रहना है, मुस्कुराते भी रहना है, अपनी परेशानी को ज़याहिर नहीं करना है, चेहरे पर मनहूसियत नहीं लानी, चाहे जो कुछ भी हो जाए, चेहरा दमकता - चमकता रहना चाहिए, और बच्चे पैदा करने के लिए सदाबहार बने रहना चाहिए। यही है औरत की दुनिया, और जन्नत। उसकी अपनी कोई ज़रूरत नहीं, खुशी नहीं, सोच नहीं, वज़ूद नहीं? शादी से पहले भाईयों के लिए क़ुर्बानियां देती रहे, लिंगभेद की मार झेलती रहे, और शादी के बाद शोहर के पुरे परिवार के झंडे के निचे रहे। और सिर्फ शोहर की खुशी के लिए जिये, और ऐसे ही एक दिन अपनी सारी आरज़ूएं दिल में लिए क़ब्र में चली जाए। एक थी शबनम एक थी पूनम, दोनों  यूं ही मर गई, ख़त्म कहानी।

"अल्लाह अल्लाह ख़ैर सल्लाह" 

तीन तलाक़ के विषय पर बहस हो रही है.... आजकल, कितनी भी बहस हो ले, इस मसले पर, तानाशाही हकूमत में कोई फर्क़ पड़ने वाला नहीं है..... लानत है उन तानाशाहों पर, कि जिन्होंने हर वक्त उनकी जीहूजीरी में, मातहती में गुज़ारा है, और उन्होंने एक झटके में तलाक़ तलाक़ तलाक़ कहकर फैसला सुना दिया.... अल्लाह तआला का अर्शे अज़ीम हिला दिया..... एक लफ्ज़ का जब चाहे ग़लत इस्तेमाल कर लिया, लानत है ऐसे दकियानूसी, पुरुषवादी मानसिकता पर....... ऐसे लानत याफ्ता तानाशाहों के निकाह के अंदर रहें, या बाहर.... फज़ीहत तो होनी ही है, औरत की... निकाह के अंदर हैं तो, सिर पर मुसल्लद तानाशाह जीने नहीं देता.... और निकाह के बाहर रहो तो, लोग और परिवार वाले, अपने खून के ही रिश्ते, जीना दुश्वार कर देते हैं....

तलाक़ कहां जायज़ है, और कहां नाजायज़ है सबसे पहले यह समझने की ज़रूरत है, तलाक़ केवल मर्द ही नहीं दे सकते हैं, ज़रूरत पड़ने पर, औरतें भी ले सकती हैं, यदि किन्हीं कारणों से औरत अपने शोहर से खुश नहीं है, जुल्म सहती है, दबाई जाती है, मानसिक, शारीरिक, आर्थिक तकलीफों से गुजरती है, उसके साथ परिवार (ससुराल ) में ग़ैरबराबरी होती है, तो औरत भी तलाक़ ले सकती है, उसके माता-पिता, भाई-बहन  को जबरदस्ती रिश्ता निभाने के लिए मज़बूर नहीं करना चाहिए। और खुला लेने की इजाज़त देनी, चाहिए उसे मानसिक, आर्थिक, शारीरिक सपोर्ट करना चाहिए। लेकिन अफसोस माँ-बाप, भाई - भाभी  उसे उसी नर्क में धकेल देते हैं सिसक- सिसक के मरने के लिए। तलाक़ देने लेने का हक़ मर्द और औरत को बराबर है, इस्लाम में। लेकिन समाज - परिवार में फैली ग़ैरबराबरी के कारण होता यह है कि मर्द तो बीवियों की छोटी-छोटी सी ख़ताओं के लिए, अपनी जरूरतों के लिए तलाक़ दे देते हैं, अपनी बीवियों को। और  औरत का कोई सहारा नहीं वो एक छत के नीचे रहने के लिए, शोहर की और उसके परिवार की जादतीयों को सहती रहती है, क्योंकि ऐसी स्थिति में उसके मायके वाले भी साथ छोड़ देते हैं। आज अत्याधुनिक - डीजीटेल होने के बाद भी लोग, सड़ी गली मानसिकताओं को ढो रहे हैं। मौलाना तारीक़ जमील का ब्यान इस तरह की समस्याओं पर बहुत सटीक है, तलाक़ जैसे मसलों पर और मर्द - औरत के हक़ूक़ जैसे मसलों में, ग़ैरबराबरी दूर करने की ज़रूरत है। कुर्आन को पढ़ने से ज्यादा समझने की ज़रूरत है, अगर सही तफसीर (व्याख्या ) को समझकर उसपर अम्ल किया जाए तो, बहुत कुछ अच्छा हो सकता है, लेकिन अफसोस  ज्यादातर मुसलमान अर्बी भाषा की रीडिंग ही कर रहे हैं, अर्थ को मंतव्य को समझने की कोशिश नहीं करते हैं।

       मेहजबीं
( ये लेखक की अपनी राय है  )

Post a Comment

Popular posts from this blog

सीतामढ़ी महादेवपट्टी गाँव में हुए गैस लीक काण्ड में झुलसे एक और जख्मी मुकेश पासवान की मौत/मृतक और पीड़ित परिवार को मदद नही

मोहम्मद दुलारे
__________
परिहार(सीतामढ़ी)।महादेवपट्टी गाँवमें हुए गैस लीक काण्ड में झुलसे एक और जख्मी मुकेश पासवान की मौत शनिवार को एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में हो गई। इस प्रकार इस घटना में अब तक मरने वालों की संख्या 3 हो गई है। मुकेश से पहले 31 अक्टूबर की रात रामप्रवेश पटेल और 3 नवंबर को मुकेश की 3 वर्षीया भतीजी राधा की मौत भी इलाज के दौरान एसकेएमसीएच में हो गई थी। यहाँ बता दें कि छठ पूजा से एक दिन पूर्व 25 अक्टूबर की रात महादेव पट्टी के मुकेश पासवान के घर में खाना गरम करने के दौरान पहले से लीक गैस में अचानक आग लग गया था। इस घटना में मुकेश सहित परिवार के 11 लोगों के अलावा पड़ोसी रामप्रवेश पटेल भी झुलसकर गंभीर रुप से जख्मी हो गए थे। घायलों को ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों की मदद से स्थानीय पीएचसी परिहार में भर्ती कराया गया था,बाद में सभी घायलों को एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर रेफर कर दिया गया था। जिनमें से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना से गाँव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।तीन मौत के बाद टूटा भरोसा ः एसकेएमसीएच में एक-एक कर 3 घायलों की मौत के बाद  परिजनों का सब्र जवाब दे गया है। परिजनो…

तालिमी मरकज़ के शिक्षा स्वयं सेवक राजनीती का शिकार न बने

बिहार प्रदेश के सभी तालिमी मरकज़  साथियों  व्हाट एप्प पर बिना मतलब बहस ,इल्ज़ाम तराशी से कुछ हासिल होने वाला हो तो बतलाये ।इस फालतू के बहस से कुछ हासिल होने को नही है लिहाज़ा खामखा के बहस से बचा जाये।
तालिमी मरकज़ हों या उत्थान केंन्द्र के साथी सभों की ख्वाहिश है कि उनको सरकार राज्य कर्मी घोषित कर वेतनमान दे मगर ज़रा सोचें क्या सरकार ये माँग  तालिमी मरकज़ और उत्थान केंन्द्र को देने जा रही है ?
सोचने वाली बात ये है कि जब सरकार तालिमी मरकज़ और उत्थान केंन्द्र के कर्मी को निविदा कर्मी और नियोजित मानने को तैयार नही -------
ऐसे हालात में हमारे तालिमी मरकज़ के साथी ये भ्रम पाले हुए हैं कि सरकार निश्चय यात्रा के खात्मा पर तश्त में पेश कर बहुत बड़ी चीज पेश करने जा रही है इस लिए सरकार के सामने सांकेतिक तौर पर भी बैठक कर अपनी कोई माँग न रखें। और तरह तरह के मिसाल पेश कर डराया जा रहा है जो ग़ैर मुनासिब है।
आप ये कान खोल कर सुन लें आप की सेवा 60 साल होगी ये संकल्प में नही बल्कि सरकार का ये कहना है कि 60 साल तक सेवा लेगी।आपने जो अपने ख्वाब व ख्याल में पाल रखा है क्या वह बिना क़ुर्बानी के हासिल किया जा सकता है…

खबर का असर परिहार में अतिक्रमण मुक्त अभियान जारी

परिहार  (सीतामढी )।dailychingari ने दिनांक 19/09/2016 को "बस से कुचल कर 06 वर्षीयबच्चे की मौत " शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था जिसमें घटना के पीछे सड़कों का अतिक्रमण को मुख्य कारण माना था प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और परिहार की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान शुरू कर दिया है देखना अब यह है कि प्रशासन इसे कितनी तत्परता से लेती है। ज्ञात हो कि सड़कों के अतिक्रमण और जर्जर सड़क के कारण पूर्व में भी हाईस्कूल के समीप ट्रक से कुचल कर इंदरवा निवासी एक नौजवान की मौत घटना स्थल पर ही हो गईं थी अगर उस समय घटना को गंभीरता से ले लिया जाता तो घटना की पुनः पूर्णावृति नहीं होती और एक जान काल के गाल में जाने से बच जाता ।

शिक्षक भिखारी महतो जिसने इन्दरवा विद्यालय की तस्वीर बदल दी

रितु जायसवाल एक सरकारी विद्यालय और एक शिक्षक ऐसा भी!
बिहार! एक ऐसा राज्य जो अपनी ऐतिहासिक गौरवगाथा के साथ साथ सरकारी शिक्षा तंत्र के बदहाली केलिए भी जाना जाता है। प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, सब के हालात दयनीय। माने न माने पर यह एक हकीकत है जिससे न मानने वाले भी अंदर ही अंदर सहमत होते हैं। कोशिश में लगी रहती हूँ की कम से कम पंचायत की मुखिया हूँ तो अपने पंचायत में शिक्षा की तस्वीर बदले पर बदलना तो दूर, तस्वीर बनती तक नहीं दिख रही। अपने पंचायत में जब विद्यालय नहीं मिला (विद्यालय हकीकत में तो खाना खाने का मेस बन गया है) तब थक कर ढूंढने निकली की कहीं तो कोई शिक्षक या विद्यालय होगा जहाँ हकीकत में बच्चों को "विद्यालय" और "शिक्षक" जैसे महान शब्द का मतलब का एहसास होता होगा। तो इस तलाश में मुलाक़ात हुई सोनबरसा के एक पत्रकार बीरेंद्र जी से जो जब मिलते थे तब यही कहते थे की इंदरवा स्कुल देखने कब चलिएगा? इस प्रश्न में उनकी उत्सुकता देखने योग्य रहती थी जैसे वो कुछ बड़ा ही अद्भुत चीज़ दिखाना चाहते हों। 4 से 5 बार उन्होंने कहा पर किसी न किसी कारण से नहीं ही जा पाई। पर आखिरकार एक दि…

बस से कुचल कर 10 वर्षीय बच्चे की मौत

परिहार  (सीतामढी )।बस से कुचल कर 10 वर्षीय बालक की मौत घटना स्थल पर ही हो गई।घटना  परिहार चौक से सटे ट्रांस्फ़र्मर के निकट की है मृतक परिहार निवासी तेज नारायण सिंह का पौत्र है।मृतक शुभम कुमार अजय कुमार सिंह का पुत्र है
                घटना को लेकर आक्रोशित लोगों ने परिहार को पुरी तरह बंद कर दिया है।साथ ही घटना के विरोध में टायर जला कर मुख्य मार्ग को बंद कर दिया ।परिहार में अक्सर दुर्घटनाओं में मृत्यु होती रहती है मगर शासन प्रशासन सचेत नही हो रही है जो चिंता का विषय है दुर्घटनाओं के पीछे एक अहम कारण सड़कों का अतिक्रमणकारिओ के द्वारा सड़कों का अतिक्रमण है।