" परिहार में धान गबन और शिकायतकर्ता को धमकी – जांच अधिकारी से क्या उम्मीद करें ? ”

**“परिहार में धान गबन और शिकायतकर्ता को धमकी – जांच अधिकारी से क्या उम्मीद करें?”**  
**सीतामढ़ी, बिहार – 28 अप्रैल 2026**  
खरीफ विपणन मौसम 2025‑26 के तहत प्रखंड परिहार के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) और व्यापार मंडल द्वारा धान खरीद, मिल प्रक्रिया, भंडारण और भाड़े के वाहनों के जरिये चावल पहुँचाने की पूरी प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक जनहित शिकायतकर्ता ने इस तंत्र के खिलाफ एक व्यापक मेमोरेंडम जांच अधिकारी के समक्ष रखा है और साथ‑साथ यह शिकायत भी की है कि उन्हें धमकाकर शिकायत वापस लेने के लिए कहा जा रहा है। 
***### शिकायतकर्ता कौन और आरोप क्या?  
परिहार, जिला सीतामढ़ी निवासी मो० कमरे आलम ने जिला सहकारिता के माध्यम से जांच अधिकारी के नाम दिए गए मेमोरेंडम में आरोप लगाया है कि PACS और व्यापार मंडल द्वारा “कागजी धान खरीद” के नाम पर सरकारी राशि का गबन किया जा रहा है।  इसमें धान खरीद, मिल‑प्रक्रिया, गोदाम स्टॉक, वाहन रजिस्टर, बिजली बिल और फसल छति अनुदान तक के आधार पर भौतिक‑लिखित जांच की मांग की गई है। 
शिकायत में खास बात यह है कि जो धान “कागजों में” खरीदा गया दिखाया जाता है, क्या वह वास्तव में गोदामों में भंडारित है और मिल में चावल बनाने के बाद जो शेष धान या अवशेष रहता है, क्या उसका सही रिकॉर्ड रखा गया है। बिहार के अन्य जिलों में हुए धान गबन के मामले (जैसे मोतिहारी, दरभंगा, पटना) दिखाते हैं कि इस तरह के आरोप आज नए नहीं हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी जांच अक्सर रुक‑टुक जाती है। 
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### जांच के लिए किन‑किन बिंदुओं को उठाया गया?  
मेमोरेंडम में निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग की गई है:  
- **गोदाम स्टॉक का भौतिक सत्यापन:** PACS/व्यापार मंडल के गोदामों में भंडारित धान का वास्तविक स्टॉक और रजिस्टर का मिलान करना। 
- **मिल के बाद बचे धान/अवशेष की जांच:** मिल में चावल बनाने के बाद जो धान, छिलका या हथावा रहता है, वह कहाँ भंडारित है और उसका रिकॉर्ड क्या है ? 
- **वाहन रजिस्टर और लदान:** PACS द्वारा मिल तक धान भेजने में प्रयुक्त वाहनों, वेबिल/ट्रांसपोर्ट प्रमाणपत्र, आयात‑निर्यात रजिस्टर और बैंक डाटा का मिलान। 
- **बिजली बिल और उत्पादित चावल:** मिल की बिजली खपत को UPCL/संबंधित बिजली विभाग के बिल के साथ जोड़कर चावल उत्पादन से मिलान करना, ताकि फर्जी‑मिलिंग या कागजी रिकॉर्ड का पता चल सके। 
- **फोटोग्राफ और धान खरीद कैम्प:** धान खरीदते समय लगे बैनर और “तौलते हुए” तस्वीरें, जो सरकारी नियमानुसार दिखानी होती हैं, उनकी प्रति जांच के लिए आवश्यक कही गई है। 
- **CMR–SFC रूट और भाड़ा प्रमाणपत्र:** CMR (Centralized Milling Centre) और SFC (राज्य खाद्य निगम) तक चावल पहुँचाने में प्रयुक्त वाहनों, चालक पहचान, लदान रजिस्टर, रसीद और भाड़ा प्रमाणपत्रों की जांच। 
- **फसल छति अनुदान का दोहरा लाभ:** जिन किसानों के नाम पर धान की कागजी खरीद दिखाई गई है, क्या उन्होंने उसी फसल के लिए फसल छति अनुदान या अन्य कृषि सहायता योजनाओं का लाभ भी लिया है—DBT और कृषि विभाग के रिकॉर्ड से जांच। 
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### प्रखंड स्तरीय अधिकारियों पर मिलीभगत का संदेह  
शिकायतकर्ता का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कागजी खरीद, गोदाम स्टॉक घटाना, फर्जी रजिस्टर और वाहन रिकॉर्ड छुपाना जैसी अनियमितताएँ प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCPO) और प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी (BCO) के बिना संभव नहीं हैं।  बिहार में हाल के वर्षों में रोहतास, सासाराम और अन्य जगहों पर निगरानी विभाग ने प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों को रिश्वत लेते या गबन के मामलों में गिरफ्तार किया है, जो यह दर्शाता है कि यह एक “सिस्टम‌‑लेवल गड़बड़ी” बन चुकी है। 
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### धमकी वाला मैसेज: जनहित शिकायत को दबाने का प्रयास?  
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जांच अधिकारी के समक्ष यह शिकायत पेश करने के बाद शिकायतकर्ता के मित्र को प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी परिहार, सुरेन्द्र महतो ने मैसेज कर धमकी दी कि कमरे आलम से कहें कि वे अपना आवेदन वापस ले लें, अन्यथा आप दोनों के विरुद्ध “सहकारिता विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप” में अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। 
यह न केवल एक नागरिक को भयभीत करने का प्रयास लगता है, बल्कि जांच अधिकारी के निर्देशों को नज़रअंदाज़ करने और सत्ता के दुरुपयोग का भी संकेत देता है। निगरानी विभाग की हालिया कार्रवाई और अन्य जिलों के धान‑गबन मामलों से साफ है कि ऐसे प्रयास अक्सर भ्रष्टाचार‑चक्र का हिस्सा होते हैं। 
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### जांच अधिकारी से क्या अपेक्षाएँ?  
शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारी से मांग की है कि:  
- गोदाम स्टॉक, मिल रिकॉर्ड, वाहन नम्बर, बिजली बिल, फोटोग्राफ, CMR‑SFC रूट और फसल छति अनुदान लाभ की **विस्तृत लिखित‑भौतिक जांच** का प्रतिवेदन तैयार किया जाए।  
- जहाँ भी गबन, फर्जी‑रिकॉर्ड या भ्रष्टाचार पाया जाए, वहाँ PACS अध्यक्ष, व्यापार मंडल अध्यक्ष, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी, प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी और मील प्रबंधन के विरुद्ध **विभागीय और आपराधिक कार्रवाई** सुनिश्चित की जाए। 
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### अंतिम टिप्पणी: जिम्मेदारी और पारदर्शिता  
धान खरीद प्रक्रिया अब सिर्फ “केंद्र या राज्य स्तर” की बात नहीं

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