30 जनवरी को राष्ट्रीय आतंक विरोधी दिवस घोषित किया जाए

Mustaqim Siddiqui
राष्ट्रीय संयोजक
इंसाफ इन्डिया
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प्रधानमंत्री महोदय ,इस पत्र के द्वारा मैं आपसे आशा करता हूँ के आप इसे देश की मन की बात समझेंगें , चुंके अब मेरी अपनी मन की बात पर भी हमारा अधिकार खत्म होता नजर आ रहा है , आपके शाशन काल में हमारे कुछ अधिकार छीन लिये गये हैं , कुछ छीनने की कोशिशें की गइ हैं और कुछ छीनने की कोशिशें हो रही है l इस बिच अभी हमें बोलने और लिखने की आजादी और अधिकार है इसलिये लिख रहा हूँ , पता नही यह अधिकार भी किसी रात में नोटबंदी की तरह छीन ली जा सकती है या सशर्त प्रतीबंध (500/1000 की नोटों की तरह) भी लगाया जा सकता है , हम तो देश के एक आम नागरिक हैं आप या आपके लोग हमें कभी भी देशद्रोही बोल या लिख सकते हैं , देशद्रोही लिख या बोल ही नही ब्ल्के साबित भी कर सकते हैं जैसा के हमने कई लोगों के साथ होते देखा है l देशद्रोही बोलने या लिखने की आजादी आपके द्वारा या आपके पाठशाला द्वारा गैर संवैधानिक तौर पर फैलाई गई है , देशद्रोही शब्द से आतंकवाद का एक बहुत ही मजबुत रिश्ता है , और जैसा हम जानते है की आप आतंकवाद के विरूद्ध विश्वव्यापी सहयोग जुटाने में पुरी कोशिश कर रहे हैं l

हमारा देश भारत भी आतंकवाद से आजादी के बाद से ही पीड़ित है और हमने आतंकवादियों के हाथ से राष्ट्रपिता , दो प्रधानमंत्री (श्रीमती इन्दिरा गांधी एवं श्री राजीव गांधी) , एक मुख्यमंत्री बेअंत सिंह , एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, वीर उन्नी कृष्णन के साथ, संसद हमला , ट्रेन ब्लास्ट , 26/11, बस्तर में कई बड़े लिडर , आम नागरिकों समेत, जेएनयु के नजीब , बीफ के नाम पर अखलाक , अय्यूब , नोमान , मजलुम , इमतियाज , मिन्हाज जैसी क्रूर आतंक को झेला है l

प्रधानमंत्री महोदय हमने सुना है के आप सरदार पटेल और शिवाजी महाराज की याद में प्रतिमा बनवा रहे हैं ज़िसमे करोड़ों का खर्च आ रहा है , एक आम ज़िम्मादार नागरिक होने के नाते हमारी एक विन्ती है के आतंकवादी हमलों में जान गंवाने वालों की याद में भी एक स्मारक या संग्राहालय बनायें , उस स्मारक या संग्राहालय में पुरी विस्तृत जानकारी देने की  व्यवस्था हो , आतंकवादियों के हाथों शहीद होने वालों के नाम पर सच्ची श्रधांजली अर्पित करने के लिये 30 जनवरी को राष्ट्रीय आतंकविरोधी दिवस मनाया जाये चुंके देश ने 30 जनवरी 1948 को बापू पर पहला आतंकवादी हमला झेला था l
देश के तमाम स्कूलों के पाठयकर्मों में कक्षा 9 या 10 में एक अध्याय पढ़ाया जाये जो देश में आतंकवादियों के हाथों शहीद को एक श्रधांजली के रूप में होगी , देशहित में आतंकवादियों से कभी भी कहीं भी लोहा लेने के लिये सभी स्कुलों में सैनिक ट्रेनिंग अनिवार्य की जाये l

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