महिला सशक्तिकरण और आरक्षण का दुरूपयोग

मोहम्मद सऊद आलम
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बिहार मे महिलाओं को पंचायत चुनाव मे 50% आरक्षण महिला सशक्तिकरण के नाम पर दिया गया ।
आज देखने वाली बात यह है कि कितनी %महिलाएं पंचायत के कामों मे अपना समय देती हैं ।महिलाएं जीतने के बाद मर्दों के जरिए घर के चहार दिवार मे क़ैद कर दी जाती हैं।और खाना बनाने का काम करती हैं और उनके अधिकार का निर्वहन उन के पति/पुत्र या अन्य के जरिए किया जाता है। जनता / पदाधिकारी के द्वारा पति /पुत्र या अन्य को ही मुखिया की उपाधि दे दी जाती है।
प्रखंड/ पंचायत स्तरीय बैठक मे महिला मुखिया के 99%पति मिनिट बुक पर पत्नी का दस्तखत करते हैं जो निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के अधिकार का हनन है। पंचायत के आम सभा मे पति  अध्यक्षता करते हैं और वक्ता उन्हे ही मुखिया जी से सम्बोधित करते हैं ।क्या यही आरक्षण और महिला सशक्तिकरण है ?
मै बिहार के माननीय मुख्यमंत्री महोदय ,सीतामढी के ईमान्दार जिला पदाधिकारी महोदय और परिहार प्रखंड के ईमान्दार प्रखंड विकास पदाधिकारी महोदय से माँग करता हूँ कि अधिकार का हनन न  होने दिया जाये ।और निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के अनुपस्थिति में सभा का नेतृतव करने वाले पति/पुत्र पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  मुझे पूर्ण आशा है ,मेरे इस छोटे से निवेदन पर  सहानुभूति पूर्वक विचार किया जायेगा ताकि आरक्षण का सही उपयोग हो सके ।

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